कौन कहता है सिर्फ वक्त बदलता है !!!


वक्त के साथ बदलता रहा सब कुछ
कौन कहता है सिर्फ वक्त बदलता है !!!

हम भी बदले हालात भी बदले सभी
बदलने को यहाँ सर्वस्व बदलता है !!!

बदलने की हिचक न कोई अब रही
उठती नज़र में मंजर बदलता है !!!

कागज़ों पर बदले हैं कई रूप यहाँ
हकीक़त में सिर्फ कागज़ बदलता है !!!

हाँ बदलना है जो वही न बदला बस
कि देश कब हकीकत में बदलता है !!!

बदलते इंसानों की भीड़ फैली बहुत
भीड़ में कब कोई इंसान बदलता है !!!

गीत कविता कहानी ग़ज़ल उपन्यास
समाज की ही दशा का रूप बदलता है !!!

7 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

7 responses to “कौन कहता है सिर्फ वक्त बदलता है !!!

  1. बहुत सुन्दर रचना | सटीक कटाक्ष |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

  2. अनाम

    सुंदर रचना …वक़्त तो पलों में भी बिखर कर खड़ा है अपनी जगह .वक़्त को बहाना बना कर रूप बदल जाते हें एक सोच की तरह

  3. अनाम

    सुंदर . बदल जाता है रूप अपनी -अपनी सोच के साथ कही अच्छा कही बुरा .वक़्त तो अपनी जगह खड़ा तुम्हारी चाल देखता हैं

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