सोचो तो ….


सहज सरल सा जीवन सब कुछ सरल
जटिल कैसे हुआ ,किसने किया, सोचो तो ।
छोटी-छोटी चाहतें,छोटी-छोटी ख्वाहिशें
बड़ी और बड़ी कैसे हुईं, कब हुईं, सोचो तो ।
जीवन कब रुका था, कब थमा  था
चल रहा है अपने जन्म से
जीवन भागने कब लगा ,क्यों भला, सोचो तो ।
मिटना नियति है जैसे जन्म है निश्चित
सीधा सा क्रम प्रकृति का, नया क्या है सोचो तो ।
प्यार, आदर, करुणा, ममता अनेकानेक रंग
इन रंगों को भर पाना मुश्किल क्यों है, सोचो तो ।
इतना कठिन तो नहीं, लाना मुस्कान को कहीं से
होंठ खिचते नहीं फिर भी बिन प्रयास क्यों, सोचो तो ।
हर सवाल का जवाब है , आप ही के पास
फिर क्यों सदा सवाल ही सवाल ,सोचो तो …..

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10 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

10 responses to “सोचो तो ….

  1. हर दिन थोड़ा सुलझता हूँ, पर दुनिया उतना ही बोझ बार बार लाद देती है।

  2. anju(anu)

    बहुत खूब

    आक के वक्क्त में रुक कर सोचना …किस के पास वक्त है इतना ….

  3. यशवन्त माथुर

    बहुत ही बढ़िया

    सादर

  4. प्यार, आदर, करुणा, ममता अनेकानेक रंग
    इन रंगों को भर पाना मुश्किल क्यों है, सोचो तो
    सार्थक प्रश्न ….कोशिश हमें ही करनी है ….!!

  5. sahaj bhaav se saral shabdon mein gahan baat kahnaa Inuji kee kalam kee khaasiyaat hai,prabhu se praarthnaa hai kalam aur zazbaa yun hee chaltaa rahe

  6. Bahut badhiya likha hai aapne. Bus sochne ki liye hi tho kisike paas waqt nahin raha warn aaj bahut saari museebathen aasaan ho jaathin.

  7. बहुत ही सुन्दर एवं गहन लेखन ………आभार

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