तुझे याद करते-करते ग़ज़ल मैं लिखूँ


तुझे याद करते -करते कोई ग़ज़ल मैं लिखूँ
तेरे साथ गुज़रा लम्हा हर एक पल मैं लिखूँ.

ये दौर किस तरह का,कौन बताएगा यहाँ
हर शख्स की बदलती हुई शकल मैं लिखूँ।

इक रोज़ तो मिला था वो आप ही खुद से
उस रोज़ को खोजकर फिर धवल मैं लिखूँ।

मजहब तो कहता प्यार कर पर सुने है कौन
इस प्यार की बात पर कुछ नवल मैं लिखूँ।

तेरी याद जब भी आए भीग जाएँ मेरी ग़ज़लें,
ज़माने से छुपाने को संभल-संभल मैं लिखूँ।

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45 टिप्पणियाँ

Filed under गज़ल

45 responses to “तुझे याद करते-करते ग़ज़ल मैं लिखूँ

  1. यशवन्त माथुर

    ये दौर किस तरह का,कौन बताएगा यहाँ
    हर शख्स की बदलती हुई शकल मैं लिखूँ।

    लाजवाब!

    सादर

  2. आपकी यह रचना आज गुरुवार (11-07-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

  3. अनाम

    Maan ke vichaar bahut hi achhe tarike se vayakt kiye hai.

  4. shabdon ka yah taanaa baanaa..jeevan ka sangeet pooraana
    naval bhaw mangalmayi chahat, gajal sahi me bahut suhana

    Sadar,
    Upendra Dubey

  5. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

  6. dnaswa

    मजहब तो कहता प्यार कर पर सुने है कौन
    इस प्यार की बात पर कुछ नवल मैं लिखूँ।..

    कौन सुनता है आज मजहब की बातें .. वो तो बस दुश्मनी के लिए रह गया है ….

  7. अनाम

    lajawaab bhav……तेरी याद जब भी आए भीग जाएँ मेरी ग़ज़लें,
    ज़माने से छुपाने को संभल-संभल मैं लिखूँ।

  8. GGShaikh (Gyasu Shaikh)

    यह हुई न बात
    इंदू जी …!
    आपकी प्रश्नालीटी
    के अनुरूप …!

  9. तेरे साथ गुज़रा लम्हा हर एक पल मैं लिखूँ.

    Bahut hi pyaara bhaaw, padhkar accha lagaa..

  10. आपने लिखा….हमने पढ़ा….
    और लोग भी पढ़ें; …इसलिए शनिवार 13/07/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी…. आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    लिंक में आपका स्वागत है ……….धन्यवाद!

  11. ये दौर किस तरह का,कौन बताएगा यहाँ
    हर शख्स की बदलती हुई शकल मैं लिखूँ।

    bahut sundar likha hai Indu !

  12. आशाएँ – अरमान – उम्मीदें सिर्फ तुम पे लगी है…।
    मेरे दिल की रुकी ये धडकनें तेरे नाम से चलने लगी है …..! कमलेश रविशंकर रावल

  13. anu

    इक रोज़ तो मिला था वो आप ही खुद से
    उस रोज़ को खोजकर फिर धवल मैं लिखूँ।
    बहुत सुन्दर….
    अनु

  14. kaafi umda rachna indu mam…
    mujhe sabse achi pankti ye lagi ;
    ” तेरी याद जब भी आए भीग जाएँ मेरी ग़ज़लें,
    ज़माने से छुपाने को संभल-संभल मैं लिखूँ। ”
    bahut achi kavita… 🙂

  15. बहुत खूब…
    बहुत ही बेहतरीन मनभावन गजल…
    🙂

  16. Kalipad "Prasad"

    मजहब तो कहता प्यार कर पर सुने है कौन
    इस प्यार की बात पर कुछ नवल मैं लिखूँ।– बेहतरीन गजल..
    latest post केदारनाथ में प्रलय (२)

  17. ज़माने से छुपाने को संभल-संभल मैं लिखूँ

    वाह..

  18. इंदु जी बेहद सुन्दर लिखा है!
    लगता है कि प्रत्येक शब्द का चयन करने में काफी मशक्कत की है!
    साधुवाद!
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

  19. अनाम

    इक रोज़ तो मिला था वो आप ही खुद से
    उस रोज़ को खोजकर फिर धवल मैं लिखूँ।

    गागर में सागर

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