चाँद …


इतरा कर चाँद का यूँ  मौन पुकारा है
सब आशिक हमारे हैं कौन तुम्हारा है।
हर नूर हम से बरसे कि नूर ही हैं हम
चिलमन से न छुपे ऐसा रूप हमारा है।
चाँदनी हमी से रौशन है इस जहाँ में
शफ्फाफ़ बदन भी हमी को पुकारा है।
चाँद हूँ ख्वाब हूँ धड़कता हूँ दिलों में
आशिकों की आशिकी का यही सहारा है।
शायरों की शायरी मंझधार में ही तैरती
कलम को भी मिला मुझसे ही किनारा है।

20 टिप्पणियाँ

Filed under गज़ल

20 responses to “चाँद …

  1. चाँद ही मन है
    चाँद ही ख्वाब है
    चाँद ही दिल है
    चाँद ही धड़कन है
    चाँद ही प्यार है
    और आपके कलम की
    रफतार ही चाँद है !
    सुन्दर रचना की बधाई !

  2. आपने लिखा….
    हमने पढ़ा….
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 17/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ….पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

  3. अनाम

    क्या बात है चाँद का एहसास मदहोशी भरा, जैसे आशिकाना ….बहुत खूब

  4. Himanshu Jha

    Hi Indu ji,

    Yesterday I was part of an event where Ashok Chakradhar ji, CM Delhi was present. It was occasion of  book launch of Satpal ji, he is PA to CM Delhi and it was his third book. He is also a great writer like you, he said the same words which is mentioned on top your blog, कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है….

    I don’t know how easily you guys express your feelings. I am die heart fan of yours and please keep posting me your new creative thoughts. 

    regards, Himanshu

    ________________________________

  5. चांद की शुंदरता अक्षुण्ण है चाहे वह पूरा हो या आधा ।

  6. चांद की सुंदरता अक्षुण्ण है चाहे वह पूरा हो या आधा ।

  7. anju(anu)

    उफ़ ये चाँद बेचारा :))

  8. dnaswa

    हर नूर हम से बरसे कि नूर ही हैं हम
    चिलमन से न छुपे ऐसा रूप हमारा है..

    सुभान अल्ला … ऐसा नूर बना रहे जो चिलमन से भी न छुपे ….
    लाजवाब गज़ल है …

  9. वाह चाँद का इतराना वाजिब है ….!!

  10. अनाम

    चाँद हूँ ख्वाब हूँ धड़कता हूँ दिलों में
    आशिकों की आशिकी का यही सहारा है…बहुत सुंदर..

  11. इंदु जी बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है! साधुवाद!
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

  12. इंदु जी बेहद सुन्दर लिखा है!
    लगता है कि प्रत्येक शब्द का चयन करने में काफी मशक्कत की है!
    साधुवाद!
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

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