मंजिलें हैं अभी और भी…


बदलता है दौर भी
बदलता है ठौर भी।

बदलते ज़माने में
बदलते हैं तौर भी।

मिज़ाज पर मौसम के
रक्खो ज़रा गौर भी।

जद्दोजेहद ज़िंदगी की
बदलती है कौर भी।

थकना नहीं रुकना नहीं
मंजिलें हैं अभी और भी।

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11 टिप्पणियाँ

Filed under गज़ल

11 responses to “मंजिलें हैं अभी और भी…

  1. Sanjay bhaskar

    मंत्रमुग्ध कर दिया आपने।

  2. आपने लिखा….
    हमने पढ़ा….
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 24/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ….पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

  3. sugandha118

    Wow…Manzilen hain abhi aur bhi 🙂 sounds so beautiful and motivating

  4. कहाँ जगह एक रुक यूँ जाना,
    जीवन जब तक, साथ निभाना।

  5. थकना नहीं रुकना नहीं
    मंजिलें हैं अभी और भी।
    …बहुत सुन्दर

  6. Life goes on and on..
    people come, people go..
    they change, or we change..
    and clock just keeps on ticking 🙂

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