तुम्हारे लिए !


क्या लिखें अब हम तुम्हारे लिए
हर शब्द, निःशब्द तुम्हारे लिए।
आँखों में बसे हो जज़्ब भी कहीं
और क्या हम कहें तुम्हारे लिए।
ये रिश्ता है क्या मालूम तो नहीं
ह्रदय से उपजा जो तुम्हारे लिए।
अज़ीज़ हो कितना ये कैसे कहें
हर दुआ हमारी है तुम्हारे लिए।
तुम, बस तुम और कुछ नहीं
जी लो ये जीवन है तुम्हारे लिए।

21 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

21 responses to “तुम्हारे लिए !

  1. अनाम

    क्या लिखें अब हम तुम्हारे लिए
    हर शब्द, निःशब्द तुम्हारे लिए।

    Sunder………….

  2. आपने लिखा….
    हमने पढ़ा….और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 031/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ….पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

  3. dev

    bhavnao jo shabdon ka adhar deti khoobsoorat panktiyan….adbhut diiii

  4. कोमल भावों की तरल और सुवासित निर्झरिणी सी सुन्दर कविता !

  5. समर्पण की वेदना गहरी होती है, भाव स्थिर हो जाते हैं।

  6. suneel

    बहुत खूब …अपने एहसास में छुपी सच्ची मोहब्बत को समझा दिया चंद शब्दों में …

  7. ह्रदय को छु लेने वाली रचना| निस्वार्थ प्रेम की बयार|

  8. समर्पण का भाव लिए .. सुन्दर रचना …

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