हदों की हद …


हदों में रहने वाले सरहदों की हदों से हैरान
हद फिर भी मिटती नहीं सरहदों की हदों पर।
हद ही है कि हद की  सीमा न रही कोई
हद कर दी हदों ने, हदों में रहने वालों पर।
बेचैन हो रही हद अब, अपनी ही हदों से
कौन रोकेगा इसे हद हो जाने पर।
कुछ हदें तो तय थीं, दरम्याँ हमारे भी
पार वो भी हो गईं न कोई हद ज़माने पर।
हदों ने बढ़ा दिए न जाने कितने फासले
हद बेहद ज़रूरी है  फासलों की हदों पर।
टूटी हुई हद चाहे, बस एक उम्मीद-ए-सहर
इंतज़ार उस सहर का रहता है हदों पर।
हदों का शहर है , हैं बस्तियाँ भी हदों की
हद खिलना चाहे अब मुस्कान बन हदों पर।

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14 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

14 responses to “हदों की हद …



  1. हद ही है कि हद की सीमा न रही कोई
    हद कर दी हदों ने, हदों में रहने वालों पर।
    बेचैन हो रही हद अब, अपनी ही हदों से
    कौन रोकेगा इसे हद हो जाने पर।

    🙂
    हद करदी आपने …
    बेहद मज़ेदार !

    “हद तपे सो औलिया, बेहद तपे सो पीर
    हद बेहद दोनों तपे, वाको नाम कबीर”

    आदरणीया इंदु रविसिंह जी
    समय समय पर पढ़ता रहता हूं आपकी रचनाएं

    हार्दिक मंगलकामनाओं सहित…

    ♥ रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं ! ♥
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

  2. rajtela1

    लोग
    हद पार करने की
    बात तो करते हैं
    मगर हद तो
    जब पार होती है
    जब खुद के
    मतलब के लिए
    हद पार करते हैं
    पर जब बात
    दूसरों की हो तो
    कुंडली मार कर
    बैठ जाते हैं
    चेहरे पर चेहरा
    लगाते हैं
    अपना किया करा
    भूल जाते हैं
    सिर्फ एक बार खुद को
    इमानदारी से
    टटोल लें
    तो पता चल जाएगा
    हद कैसे पार होती है
    डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
    सोचने के लिए मजबूर करती रचना

  3. वाह,
    सीमाओं का अपना सौन्दर्य है, अपनी बाध्यता है। सीमित शरीर में असीमित मन, बड़ा ही रोचक है सीमाओं का व्यवहार।

  4. टूटी हुई हद चाहे, बस एक उम्मीद-ए-सहर
    इंतज़ार उस सहर का रहता है हदों पर।
    ….वाह! बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति….

  5. अत्यन्त हर्ष के साथ सूचित कर रही हूँ कि
    आपकी इस बेहतरीन रचना की चर्चा शुक्रवार 30-08-2013 के …..राज कोई खुला या खुली बात की : चर्चा मंच 1953 ….शुक्रवारीय अंक…. पर भी होगी!
    सादर…!

  6. Abhishek Kumar Jha Abhi

    बेहद लिखी आपने हद पे
    बहुत ही हद कर दी आपने हद पे
    अब हम किस हद तक तारीफ करें।
    बस अब और नहीं ……. हद हो गई

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