जान !!!


जान कर, जान लेना फितरत तुम्हारी
जान लेकर भी तुम न जान ले पाओगे
हर इक जान पे जिएंगी  सौ-सौ जानें
जान कर सारे भेद भी न जान पाओगे
इक रोज़ खुद अपनी बचाने को जान फिर
भागोगे भीड़ में और जान से जाओगे
कभी तो बनो तुम जान भी किसी की
जान होती है क्या फिर जान जाओगे…..

23 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

23 responses to “जान !!!

  1. Balbir Kumar Arora

    जान हो तुम सब की
    तुम कभी जान ना पाओगी
    जान कर करोगी भी क्या
    अन जान हैं सब वो
    नन्ही जान हो तुम
    फिर भी हम सब की जान हो तुम

  2. आपने लिखा….हमने पढ़ा….
    और लोग भी पढ़ें; …इसलिए शनिवार 31/08/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी…. आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    लिंक में आपका स्वागत है ……….धन्यवाद!

  3. अनाम

    क्‍या बात है….बहुत खूब..

  4. कभी तो बनो तुम जान भी किसी की
    जान होती है क्या फिर जान जाओगे…..

    ….बहुत खूब!

  5. abhi786786

    क्या बात है।
    आपकी पंक्तियों को पढके ”जान” के बारे में बहुत कुछ जान गए।

    बहुत खूब, शब्दों के साथ खेलती हैं।
    बधाई
    ”अभिषेक कुमार झा ”अभी”

  6. Shubhashish Pandey 'Aalsi'

    shabdon ki bajigari jo …arth bhi rakhti
    sundar!!!

  7. YAMAK ALANKAR KI GHAMAK …DIL KE BHEETAR UTAR JAATI HAI
    AAP KI LEKHNI ……………………….BAHUT DOOR TALAK JAATI HAI

    REGARDS

    DR GHANSHYAM MISRA . ALLAHABAD

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s