तुमने मुझे चाँद कहा …


तुमने मुझे चाँद कहा
और मैं चाँद हो गई
खुश हुई कि मैं चाँद !
तुमने कितना सही कहा
चाँद कभी करीब नहीं आता
एक दूरी निश्चित है उसके और
जहाँ के दरमियाँ
हम लाख चाहे उसे प्यार करें
वो नहीं कर सकता
अपने जज़्बात बयाँ
ये क्या किया तुमने
चाँद से प्यार !
चाहे भी तो वो नहीं आ सकता ज़मीं पर
अपनी रौशनी से तुम्हे छू तो लेगा
मगर एक दूरी निश्चित है उसकी .
उसका आदि, उसका अंत
उसका रूप, उसका रंग
उसका प्रकाश, उसका तम
कुछ भी नहीं उसके वश में
स्रष्टि के हाँथों बनी
कठपुतली है वो
ज़रूरी नहीं कि चाँदनी बिखरी है
तो हँस रहा है वो
फिर भी चाँदनी बन बिखर रहा है वो
अब सोच में हूँ मगर
कैसे खुश होऊँ भला
कि तुमने मुझे चाँद कहा …

18 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

18 responses to “तुमने मुझे चाँद कहा …

  1. yashodadigvijay4

    आपकी लिखी रचना की ये चन्द पंक्तियाँ………

    तुमने मुझे चाँद कहा
    और मैं चाँद हो गई
    खुश हुई कि मैं चाँद !
    तुमने कितना सही कहा
    चाँद कभी करीब नहीं आता

    बुधवार 02/10/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    को आलोकित करेगी…. आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    लिंक में आपका स्वागत है ……….धन्यवाद!

  2. अनाम

    बहुत सुन्दर इंदु जी………..शुभकामनाएँ!!!;

  3. suneel

    सुंदर अभिव्यक्ति आपकी ………….तू चाँद हैं …हमने तो बस इतना सोच कर कहाँ था .हर भाव हर कला में चाँद है सम्पूर्ण .फर्क बस इतना तू पास वो दूर ..

  4. चाँद बना कर दूर बिठाया,
    रहे चाँदनी संवादी बन।

  5. अनाम

    चाँद नहीं मिला कोई बात नहीं
    हम चांदनी पा कर ही खुश हैं

  6. चाड हो जाना ही महत्वपूर्ण है … करीब न सही रौशनी तो दिखाता है … दिल में होना जरूरी है …

  7. वाह्ह दिलकश अंदाज ..सुन्दर रचना … बधाई एवेम शुभकामनाये 🙂

  8. बधाई ब्लॉगर मित्र ..सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगों की सूची में आपका ब्लॉग भी शामिल है |
    http://www.indiantopblogs.com/p/hindi-blog-directory.html

  9. अनाम

    तुमने मुझे चाँद कहा ,पढ़कर बहुत अच्छा लगा ,बधाई !

  10. सचमुच अदभुत कविता है आपको बधाई

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