चाहतों की बारिशों …


चाहतों की बारिशों ने भिगाया है बदन
खुशबू-ए-इश्क से लहराया है  बदन .

ख्व़ाब फूलों की मानिंद खिलने लगे
यूँ लगा ज़िंदगी ने महकाया है बदन .

इक बोसा लबों का बहका गया जिस्म
गर्मी- ए – इश्क ने पिघलाया है  बदन .

आइने में दिख रहा है अक्स बस तेरा
सिमट कर खुदी में शरमाया है बदन .

तन्हा सी कट रही थी शाम-ए-ज़िंदगी
रौशनी-ए-प्यार ने सजाया है  बदन .

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15 टिप्पणियाँ

Filed under गज़ल

15 responses to “चाहतों की बारिशों …

  1. AAp aisey hi likhte rahiye. I simply enjoy good poetry,and look at life with a positive outllook

  2. yashodadigvijay4

    आपकी लिखी रचना की ये चन्द पंक्तियाँ………

    चाहतों की बारिशों ने भिगाया है बदन
    खुशबू-ए-इश्क से लहराया है बदन .
    ख्व़ाब फूलों की मानिंद खिलने लगे
    यूँ लगा ज़िंदगी ने महकाया है बदन .

    बुधवार 09/10/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    को आलोकित करेगी…. आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    लिंक में आपका स्वागत है ……….धन्यवाद!

  3. चाहतों की बारिशों ने मन को छू लिया !

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