मुक्तक


तेरी साँसों की खुशबू से मेरे अहसास महके हैं,
तेरे लबों की गरमी से दिल के तार दहके हैं .
मै तुझमे हूँ तू मुझमे है ये अहसास है कैसा,
तेरी नज़रों से घायल हो मेरे जज़्बात बहके हैं .

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4 टिप्पणियाँ

Filed under मुक्तक

4 responses to “मुक्तक

  1. kalipad"prasad"

    बहुत सुन्दर भाव !
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |

    नई पोस्ट सर्दी का मौसम!
    नई पोस्ट विचित्र प्रकृति

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