नहीं रुकता प्रेम


नहीं रुकता प्रेम
कभी भी
नहीं …
कभी थमता भी नहीं
कि बिना संवाद के भी
जारी है
निरंतर संवाद !

मौन की भाषा
पढ़ती हैं आँखें
मौन के संवाद
बोलती हैं आँखें
और सुनता है ह्रदय
मौन की गूँज को
कि नहीं रुकता प्रेम
कभी भी
नहीं…
कभी थमता भी नहीं ….!

8 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

8 responses to “नहीं रुकता प्रेम

  1. ACCHI AUR PRABHAV SHALI TATHA BHAV POORAN KAVITA HAI-
    BADHAI AUR SAADHUVAD –
    -OM SAPRA

  2. suneel

    सच कहा इंदु जी … जो शब्दों में नहीं बंध सकता वो रुक भी कैसे सकता हैं …सुंदर अभिव्यक्ति

  3. ये प्रेम भी न🙂
    बहुत सुंदर……..

  4. अनाम

    bahut hi sundar or adbhoot abhivayaqti ………………

  5. संजय भास्‍कर

    ….क्या कहने, बेहद उम्दा
    जरूरी कार्यो के ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ !

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