न पूछना कभी !


कई बार तुमसे
ढेर सारी बातें
करने को जी चाहता है
लेकिन मैं
बात नहीं करता
डरता हूँ
ये मत पूछना
किससे !
यही कहा था न तुमने
और
जड़ हो गए थे
हमारे शब्द, वहीँ कहीं
तुम मेरे हो ,सदा से मेरे
मालूम है मुझे
इसलिए, नहीं पूछा मैंने
कुछ भी
हाँ ! एक बात ज़रूर कहूँगी
कि कुछ ऐसा ही
या
यही कहने को
मेरा भी जी चाहता है
क्यों नहीं कह पाती
या डर लगता है
किससे 
बस ,ये न पूछना कभी  !!!

5 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

5 responses to “न पूछना कभी !

  1. Suneel

    बहुत सुन्दर ….एक मुकम्मल एहसास में जी रहे एक दूसरे को.

  2. dnaswa

    बहुत खूब … किस्से … सच है की ये दर क्यों है बताया नहीं जा पाता …

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