नहीं जँचती तुम पर …!


नहीं !
उदासी से
कोई बैर नहीं मुझे
बस
तुम पर नहीं जँचती
ज़रा भी !
खीझ आती है
कि क्यों उदास हो
झल्ला पड़ती हूँ
खुद पर
कि कैसे लाऊँ मुस्कान
तुम्हारे चेहरे पर
सच्ची वाली !
कह पाती हूँ
सिर्फ इतना
अपना ख़याल रखना
जबकि
हो जाती हूँ उदास
ये सोचकर
कि उदास हो तुम।
उदासी से
कोई बैर नहीं मुझे
बस
तुम पर नहीं जँचती
ज़रा भी ..!!!

12 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

12 responses to “नहीं जँचती तुम पर …!

  1. तुम पर जंचती नहीं उदासी जरा भी ,मन सुन्दर फिर क्यों कर घेरे उदासी।

  2. सच है, मुस्कान प्राकृतिक है, उदासी भारसम।

  3. naresh kr Gupta

    सच है दिल जिसे अपना समझ लेता है उस पर उदासी नहीं जंचती
    बहुत सुन्दर।

  4. suneel

    Nishabd kar diya is prem bhav ke ehsaas ne …dua hai.teri chahat kabhi udaas na ho na sabab bane kabhi udaasiyon ka …

  5. kulamani das

    yessssssss it is a spontaneous processes k. das

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