छाँव नेह की !


तपती धूप की जलन
और थकन के बाद
एक छाँव
तुम्हारे नेह की
कर देती है मुझे
शीतल
गायब हो जाती हैं
माथे की लकीरें .
सारी झल्लाहट
मुस्कान बन
बिखर जाती है
चेहरे पे मेरे ….!!!!

17 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

17 responses to “छाँव नेह की !

  1. अनाम

    इंदू जी बहुत शानदार अभिव्यक्ति। साधुवाद।

  2. यही है ओरेम का असर …. बहुत खूब …

  3. अनाम

    चेहरे से जो तेरी आती है मुस्कान , मेरे निश्चय मे फूँक जाती है जन .

  4. के डी तामृकार

    बहुत अच्छी है

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