मौन – 2


हमारे तुम्हारे बीच का
ये मौन
बहुत शोर करता है
इसकी बातें
कभी ख़त्म नहीं होतीं
अनगिनत सवाल-जवाब
कभी नहीं थकते
आए कितने ही
उतार – चढ़ाव
नहीं टूटा ये मौन
हाँ !
जब बेचैन हुई रूह
एक – दूजे के लिए
तेज़ आँधी सा उड़कर
पँहुच गया ये हम तक
जो तुमने कहा
जो हमने कहा
सब सुनता रहा
भावों को नज़रों से
बोलता रहा मौन …
सच है
हमारे बीच का
ये मौन
बहुत शोर करता है ….!

 

 

 

12 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

12 responses to “मौन – 2

  1. sanjay joshi

    मौन में फूल भी होते है
    मौन में शूल भी होते है

  2. Beautifully depicted emotional turmoil amidst the silence between two souls…loved it ☺

  3. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (26.02.2016) को “कर्तव्य और दायित्व ” (चर्चा अंक-2264)” पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

  4. Amit Agarwal

    Bahut din baad aapki kavita parhne ko mili 🙂
    Hamesha ki tarah bahut sundar!

  5. वाचाल है मौन………बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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