ए एन 32


तुम्हारा कुछ पता नहीं
कहाँ हो ? कैसे जानें
ज़िंदगी की नई शुरुआत
तुम्हीं से थी
पिछले सत्रह वर्षों से
एक दिन भी न गुज़रा
तुम्हारे बगैर
लगातार सालों साल
हम साथ गए समंदर पार
और देश के सभी कोनों से लेकर
विदेश यात्रा तक
कभी डर न लगा
लेकिन आज
जब तुम्हारी कोई ख़बर नहीं मिल रही
डर रहा हूँ
किसी अनहोनी से
तुम लौट आओ सकुशल
कि देश को ज़रुरत है तुम्हारी
कई परिवार
राह तक रहे
उनकी रौशनी भी
तुम्हारे साथ है
मुझे, नींद नहीं आती आजकल
कि बिन तुम्हारे
फ़ैल गया है सन्नाटा
एक सैनिक की ज़िंदगी में ।

 

 

 

 

 

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1 टिप्पणी

Filed under कविता

One response to “ए एन 32

  1. om sapra

    manniya ms induravi ji– aap ki yeh kavita kafi sahaj bhasha man ki sanvedna ko uker deti hai– bahut hi bhavpoorn ban pari hai— sannta ek sainik ki jindgi main–
    badhai–
    –om sapra, sahity sachiv,
    mitra sangam patrika,
    N-22, dr. mukherjee nagar,
    delhi-110009
    m- 981818 0932

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