इंतज़ार समझते हैं ?


इंतज़ार समझते हैं ?

जब कोई किसी के इंतज़ार में होता है
तो वह और कहीं नहीं होता है।
*****
इंतज़ार की दुनिया में फूलों से लदे कैक्टस
पानी की सतह पर तैरते हैं।
*****
दूर खिला कोई कमल किसी के इंतज़ार में नहीं रहता

लोग उसके इंतज़ार में रहते हैं।
******
जलकुंभी इंतज़ार में कैसे खत्म होती है
फिर उगती है
यह कमल को कभी नहीं मालूम होता।
*****
कैक्टस के फूल झड़ जाते हैं
उन्हें नमी की आदत नहीं।
*****
कैक्टस फिर भी बचाए रखता है हरापन
कहता है सख्त कंटको से
मैं इंतज़ार में हूँ
तुम साथ ही रहना।
*****

2 टिप्पणियां

Filed under कविता

2 responses to “इंतज़ार समझते हैं ?

  1. Dr. Renu Yadav

    खूबसूरत कविता…

    पसंद करें

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