Category Archives: शेरो-शायरी

शायराना अंदाज़-13


1- “‘टूटता बदन’ इश्क की थकान है
हर अँगड़ाई पे,खिँचा तेरा नाम है,
उफ!ये टूटन,है कितनी बेदर्द
चली आती हर सुबह-शाम है”

2- “रूमानियत-रूहानियत और जिस्मानियत,
सरगरमी-ए-इश्क, है फैली बेपरवाह।”

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शायराना अंदाज़-12


“आज बात करने का दिल ही नहीं
ख़ुदा के लिये,न मजबूर कीजिए
अभी टूटा है दिल,सम्भाल तो लूं
फिर चाहे जितने ही ज़ख्म दीजिए”

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शायराना अंदाज़-11


“ख़ता ये हुई,तुम्हे खुद सा समझ बैठे
जबकि,तुम तो…
‘तुम’ ही थे”

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शायराना अंदाज़-10


“इंतज़ार उनका,कुछ हुआ इस तरह
हो बेचैन रूह भी मचलने लगी,
हर लम्हे पे टिकी थी बेसब्र नज़र
हुआ हमें ,उन्हें दिललगी लगी।”

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शायराना अंदाज़-9


“तन्हाइयों की आदत अब हो गई हमें
तुम्हारा पास आना,अब भाता नहीं
यूं फैले हमारी चाहतों के फासले,
अब किसी चाहत से,कोई नाता नहीं”

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शायराना अंदाज़-8


“कितना आसां है कहना,कि सब कह दिया
जबकि कहना था जो,कह न सके
कितना आसां है कहना,हमने समझ लिया
जबकि समझने को कुछ था ही नहीं।”

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शायराना अंदाज़-7


“वो ठण्डी हवा के साथ कुछ बूँदें बारिश की
अलसाई हुई रात, सजी है दु्ल्हन सी
वो तसव्वुर में उतरा एक चेहरा,
जो समाया है मन में,कहीं दिखा तो नहीं।”

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