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है यही ज़िंदगी !!!


है यही ज़िंदगी !!!

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ये कैसा समय है !


ये कैसा समय है
कि सब अपने में खोए हैं
और अपने नज़रंदाज़ हो रहे
ये कैसा समय है
जब कि सब बिक रहा
और सब
बेचा भी जा रहा ….
ये ऐसा भी समय है जब आदर्श
खोखले हैं, ज्ञात है
फिर भी
इस समय में जीना है
जहाँ जिंदा हैं मरे हुए अकड़े हुए लोग
एक नव निर्माण हो रहा दुनिया का
मरे हुए मरने से डर रहे
और जीवित
जिंदा बचे रहने से !!!

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आसान नहीं होता


मर जाना सबसे आसान है
लोग कहते हैं
लेकिन  

मरने की
चाह रखना
भले आसान हो
मर जाना

कतई आसान नहीं होता ।
कैसे मरुँ
कि कष्ट भी कम हो
और मर जाऊँ !
ज़रा सोचिये
ये मनःस्थिति
कैसे

मर पाता होगा कोई
वो घुटन वो दर्द

वो तकलीफ़
हर कोई नहीं सह सकता
मर जाना, आसान
कतई नहीं होता ….

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सफ़र …


काश ! ज़िंदगी
सुपरफास्ट ट्रेन सी होती
वातानुकूलित
शयनकक्ष में बैठाकर
पँहुचा देती
गंतव्य तक
यात्रा
कितनी आरामदायक होती
थोड़ा विलंब
शायद वहाँ भी होता
किंतु
इतना तो नहीं ….
मालगाड़ी सी ज़िंदगी
कोयले से भरी
तपती है धूप में
जलती है
भीगती है
सूखती है
उछलती है
गिरती है फिर भी
ख़त्म नहीं होती
बड़ा लंबा सफ़र
तय करना होता है ….!!!

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