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ये कैसा समय है !


ये कैसा समय है
कि सब अपने में खोए हैं
और अपने नज़रंदाज़ हो रहे
ये कैसा समय है
जब कि सब बिक रहा
और सब
बेचा भी जा रहा ….
ये ऐसा भी समय है जब आदर्श
खोखले हैं, ज्ञात है
फिर भी
इस समय में जीना है
जहाँ जिंदा हैं मरे हुए अकड़े हुए लोग
एक नव निर्माण हो रहा दुनिया का
मरे हुए मरने से डर रहे
और जीवित
जिंदा बचे रहने से !!!

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