Tag Archives: इश्क

चाहतों की बारिशों …


चाहतों की बारिशों ने भिगाया है बदन
खुशबू-ए-इश्क से लहराया है  बदन .

ख्व़ाब फूलों की मानिंद खिलने लगे
यूँ लगा ज़िंदगी ने महकाया है बदन .

इक बोसा लबों का बहका गया जिस्म
गर्मी- ए – इश्क ने पिघलाया है  बदन .

आइने में दिख रहा है अक्स बस तेरा
सिमट कर खुदी में शरमाया है बदन .

तन्हा सी कट रही थी शाम-ए-ज़िंदगी
रौशनी-ए-प्यार ने सजाया है  बदन .

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इश्क !!!


इश्क में हूँ नहीं कि इश्क लिखूं मैं
इश्क के लिए अब क्या लिखूं मैं।

कब होश में रहा इश्क भी भला
बेहोश हूँ नहीं फिर क्या लिखूं मैं।

दिन वीराना शाम तन्हा रात भी
इश्क की लगी कैसी क्या लिखूं मैं।

इश्क में ख़याल,खुशबू का लिबास
सुगंध इश्क की भला क्या लिखूं मैं।

चलो कर भी लूँ गर आज इश्क मैं
इश्क में होकर कैसे,क्या लिखूं मैं।

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साँसों का लम्हा रुका सा रहा


काँधे पे सर कुछ झुका सा रहा
साँसों का लम्हा रुका सा रहा।

बंद पलकें रूह में कुछ समा सा रहा
कपकपाते लबों का फ़साना रहा।

खुशबू-ए-जिस्म की मदहोशियत न पूछो
साँसों में तेरी साँसों का पहरा सा रहा।

परछाइयां भी हसीन लगने लगीं
इश्क का कुछ ऐसा नशा सा रहा।

गहराइयाँ थीं इतनी-सागर भी कम
था लम्हा मगर,जीवन जिया सा रहा।

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शायराना अंदाज़-13


1- “‘टूटता बदन’ इश्क की थकान है
हर अँगड़ाई पे,खिँचा तेरा नाम है,
उफ!ये टूटन,है कितनी बेदर्द
चली आती हर सुबह-शाम है”

2- “रूमानियत-रूहानियत और जिस्मानियत,
सरगरमी-ए-इश्क, है फैली बेपरवाह।”

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शायराना अंदाज़-10


“इंतज़ार उनका,कुछ हुआ इस तरह
हो बेचैन रूह भी मचलने लगी,
हर लम्हे पे टिकी थी बेसब्र नज़र
हुआ हमें ,उन्हें दिललगी लगी।”

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