Tag Archives: ज़िंदगी

सफ़र …


काश ! ज़िंदगी
सुपरफास्ट ट्रेन सी होती
वातानुकूलित
शयनकक्ष में बैठाकर
पँहुचा देती
गंतव्य तक
यात्रा
कितनी आरामदायक होती
थोड़ा विलंब
शायद वहाँ भी होता
किंतु
इतना तो नहीं ….
मालगाड़ी सी ज़िंदगी
कोयले से भरी
तपती है धूप में
जलती है
भीगती है
सूखती है
उछलती है
गिरती है फिर भी
ख़त्म नहीं होती
बड़ा लंबा सफ़र
तय करना होता है ….!!!

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ए एन 32


तुम्हारा कुछ पता नहीं
कहाँ हो ? कैसे जानें
ज़िंदगी की नई शुरुआत
तुम्हीं से थी
पिछले सत्रह वर्षों से
एक दिन भी न गुज़रा
तुम्हारे बगैर
लगातार सालों साल
हम साथ गए समंदर पार
और देश के सभी कोनों से लेकर
विदेश यात्रा तक
कभी डर न लगा
लेकिन आज
जब तुम्हारी कोई ख़बर नहीं मिल रही
डर रहा हूँ
किसी अनहोनी से
तुम लौट आओ सकुशल
कि देश को ज़रुरत है तुम्हारी
कई परिवार
राह तक रहे
उनकी रौशनी भी
तुम्हारे साथ है
मुझे, नींद नहीं आती आजकल
कि बिन तुम्हारे
फ़ैल गया है सन्नाटा
एक सैनिक की ज़िंदगी में ।

 

 

 

 

 

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कल रहूँ न रहूँ !


कल रहूँ … न रहूँ
फ़र्क नहीं इसका
आज हूँ या नहीं
सवाल यही खुद से !
ज़िंदगी चल रही
तेज़ कभी मद्धम
ज़िंदगी है कहाँ
सवाल यही खुद से !

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सच है …!


सच लिखना मुश्किल नहीं
सच पढ़ना बेहद कठिन
सच कहना भी मुश्किल नहीं
पर सच सुनना
उससे भी कठिन !
बस इसी खातिर
लिखा जाता रहा झूठ
कहा जाता रहा झूठ
अपनी सहूलियतों के लिए
ज़िंदगी के दुर्गम रास्तों पर
आसानी से चलता रहा झूठ
सच है कि सब झूठ है और
झूठ है कि सब सच !
सिवा इसके कि शब्दों के
वर्ण हैं सच
शब्दों के मायने ….बचे अब शेष नहीं ….!!!

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साथ रहेंगे हम !!!


सफ़र करते हुए
खिड़की से बाहर
चमकती रेल की
पटरियों को देखकर
तुम याद आए
और नम हो उठीं आँखें .
हम दोनो
रेल की पटरियाँ
ही तो हैं
चल रहे हैं साथ
फिर भी
पूरी दुनिया के
किसी भी
छोर के अंत में
मिलेंगे नहीं हम .
कि बिन एक पटरी के
अस्तित्वहीन है दूसरी
गुज़र रही है ज़िंदगी की रेल
और समान दूरी पर
एक साथ
चल रहे हैं हम .
मालूम है कभी मिल न सकेंगे
फिर भी
अनवरत साथ रहेंगे हम !

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