मौत या मुक्ति


सुना था वो चुपके से दबे पाँव आती है
पर बिन बताए साथ ले जाती है,पता न था।

सुना था शरीर जड़वत जिंदा लाश बन जाता है
आत्मा से शरीर को ये खबर न हो,पता न था।

सुना था सुंदर घना वृक्ष भी पल में सूख जाता है
पर इतनी तेजी से कि महसूस ही न हो,पता न था।

आँखों से नमी चली जाती-पथरा जाती हैं वो सुना था
पथराई पुतलियों में हजारों सवाल जिंदा हों,पता न था।

सब कह तो रहे हैं वो आई संग ले गई अपने़
वक्त से पहले ही ले लेगी वो जाँ,पता न था।

26 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

26 responses to “मौत या मुक्ति

  1. एक एक लाइन की जितनी तारीफ की जाए कम है।

    सादर

  2. सुना था वो चुपके से दबे पाँव आती है
    पर बिन बताए साथ ले जाती है,पता न था।……………sunder abhivyakti ..pata na tha itni khubsurti se aapna kaam kar jayegi pata na tha .

  3. बहोत ही गहरी बात , बड़ी सहजता से कह डाली | धन्यवाद |

  4. मृत्यु तो ऐसी ही होती है सबको यह पता होकर भी पता नहीं रखना चाहते और जब आती है जाना ही पड़ता है ..भाव पूर्ण कविता ..बधाई …

  5. पथराई पुतलियों में हजारों सवाल जिंदा….
    बेहतर…

  6. hi indu,

    sorry maine yeh kavita poori nahi padhi…kyunki mujhe padte wakt pooraani kuch cheezein yaad aai…toh kaaran varsh adhoori chodni padi yeh kavita…

    arrey aapke blogs ko subscribe karne ka kya option hai?

  7. Very nice lines. Death is just a doorway to total freedom. Death when looked in the eye can liberate you from all that holds you back in this world.

  8. मौत का एक दिन मु -ऐईयन(सुनिश्चित ) है ,नींद क्यों रात भर नहीं आती . सुन्दर कविता -बिना एहसास के ज़िंदा हूँ ,इसलिए ,की, जब कभी एहसास लौटें ,खैर -मकदम(स्वागत ) कर सकूं., मांग अपनी भर सकूं .

  9. bahut hi khoobsurat bhav apne bahut hi saral panktiyon mein zahir kar diya…!
    maine apni hi maut ke upar ek kavita likhi thi…kabhi samay ho to padhiyega,,, 🙂

    http://me-and-my-darkside.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

  10. amazingly well written, very touching and reflective.. सब कह तो रहे हैं वो आई संग ले गई अपने़
    वक्त से पहले ही ले लेगी वो जाँ,पता न था।..
    awesome..

  11. anju(anu0

    मौत ….जिंदगी के अंत का कटु सत्य

  12. yashwant009

    कल 27/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  13. saras darbari

    तभी तो मौत इतनी रहस्यमयी लगती है ….

  14. Sanjay Mishraa 'habib'

    सत्य की प्रभावी अभिव्यक्ति…

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